Friday, October 30, 2015

अन्धभक्तिकाल की हिंदी वर्णमाला : स्वर और व्यंजन

प्रतिकविता

अन्धभक्तिकाल की हिंदी वर्णमाला :  स्वर और व्यंजन


अ से अनार : मोदी , मोदी , मोदी !
आ से आम : मोदी , मोदी , मोदी !!
इ से इमली : मोदी , मोदी , मोदी !!!
ई से ईख : मोदी , मोदी , मोदी !!!!
उ से उल्लू : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!
ऊ से ऊन : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!
ऋ से ऋषि : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!
ए से एड़ी : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!!
ऐ से ऐनक : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!!!
ओ से ओखली : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!!!!
औ से औरत : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!!!!!
अं से अंगूर : मोदी , मोदी , मोदी !!!!!!!!!!!!
अ: से ....   : मोदी , मोदी , मोदी   !!!!!!!!!!!!!



Sunday, October 11, 2015

कोई लेखन अंतिम तौर पर कभी नहीं " खुलता "

सुचिंतन -कुचिंतन  

कोई लेखन कालजयी नहीं होता

 

एक शाम हम कुछ पत्रकार और लेखक मित्र लेखन पर चर्चा करने लगे.  वो शाम कुछ हट कर थी और वो सभी मित्र भी. विगत लेखन , समकालीन लेखन , आगत लेखन, दलित लेखन , महिला लेखन , अवयस्क लेखन , वयस्क लेखन , कालजयी लेखन और अन्य कई पदबंधों से लेखन की व्याख्या होने लगी.


चर्चा उठी कि कोई कालजयी लेखन नहीं होता.  रामायण भी कालजयी नहीं. इसके कई स्वरुप और कई व्याख्याएं हैं -बाल्मिकी रामायण , तुलसी रामायण , चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की रामायण और रामानंद सागर की रामायण से लेकर  दलित संत पेरियार ई वी रामास्वामी की 'सच्ची रामायण ' तक.

एक मित्र ने कहा कोई भी लेखन पाठकों के लिए अंतिम तौर पर कभी नहीं " खुलता "  . लेखक को तो कत्तई  ये अधिकार नहीं कि  वह अपने किसी भी लेखन को अंतिम तौर पर खुल जाने की मुनादी करे.

वो चर्चा वहीँ स्थगित रह गई. अभी ना सही फिर कभी , कंही ना कहीं और चलनी चाहिए , बढ़नी चाहिए। । 

भविष्य में और भी रामायण लेखन हो सकते हैं. हर तरह के उपलब्ध रामायण का अपने वक़्त से टकराव संभव है. नया वक़्त , नए रामायण के लेखन की मांग कर सकता है. रामायण के स्वरुप जो भी हों , जितने भी हों - अहम उनके लेखक नहीं होंगे , अहम उनके लेखन की समय -पार कर चुकी आवश्यकता और इसकी पूर्ती के लिए आगे आने वाले लेखक का समय होगा.   समय नहीं ठहरता . किसी भी एक रामायण के ठहरने के सामर्थ्य में संशय स्वाभाविक है.

Sunday, October 4, 2015

वक़्त -बेवक़्त

 हाशिया की तस्वीरें: वक़्त -बेवक़्त





अजीब चीज़ है , ये वक़्त जिसको कहते हैं
कि आने पाता नहीं , और बीत जाता है (शहरयार)

Saturday, October 3, 2015

Photography is poor cousin of painting.

हाशिया की तस्वीरें :




 Photography is poor cousin of painting.

बचपन में गाँव में कज़न बहनों को ऊखल में समाठ से धान कूट-कूट चावल निकालते देखा था दादी की निगरानी में. बचपन से बालिग़ और सठियाने की कगार तक पहुँच जाने पर भी बचे उस स्मरण को अभिव्यक्त करने की कोई तरकीब नहीं सूझी. लिखने को किस्से बन सकते हैं. पर  बाल-सुलभ स्मरण ,  शब्दों के पार जाते हैं. सोचा , अगर मेरी बहनें हिन्दुस्तानी नहीं अमरीकी ' ब्लैक ' होतीं तो क्या बिम्ब सामने आता. संयोग से एक मंहगी चित्रकृति मिल गई.गरीब-सी  फोटो मेरी , चित्रकृति जिनकी भी उनका आभार.

Nepal is not a banana Republic

हाशिया की तस्वीरें: 




Nepal is not a banana Republic


Thursday, October 1, 2015

Photography Is Painting By Light

हाशिया की तस्वीरें: 


A Tribute to Amrita Sher Gill on the World Photography Day 

As a humble way of greeting to all those indulging and engaged in commemorating the World Photography Day , posting a view with some accompaniment of a book purchased @ JNU (old campus) in early 1980s which reinforced a long-held perception that ,' photography is painting by light '. The book by Derek Bowskill cost me Rs.30 only.Opening his preface with the Ronal Duncan(1964) quote " There is no light unless there is something for it to shine upon"  , the author says this was fully exploited in Antonioni's film Blow-Up , not only in it's making but also in it's subject matter : the analysis of an apparently insignificant event through the eyes of a professional photographer and his enlarger. " To see clearly is poetry , painting and photography , all in one ' , the author opines .    

I just experimented to take a photo of this book with an acclaimed painting of Amrita Sher Gill. The photo was taken under the least possible light - some from a mobile power bank's attachment.    

linking a facebook post that could not elicit much discussion on my experiment to illustrate what I had in my mind.  < https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10152999853085718&set=pb.645895717.-2207520000.1443763483.&type=3&theater>