Friday, July 15, 2016

फ़ैज़ का आख़िरी कलाम

बाअदब 

 

 

फ़ैज़ का आख़िरी कलाम


बहुत मिला न मिला ज़िन्दगी से ग़म क्या है
मताए-दर्द बहम है तो बेशो-कम क्या है

हम एक उमर से वाकिफ़ हैं अब न समझाओ
कि लुतफ़ क्या है मेरे मेहरबां सितम क्या है

करे न जग में अलाव तो शे'र किस मकसद
करे न शहर में जल-थल तो चशमे-नम क्या है

अजल के हाथ कोई आ रहा है परवाना
न जाने आज की फ़ेहरिसत में रकम क्या है

सजायो बज़म ग़ज़ल गायो जाम ताज़ा करो
बहुत सही ग़मे-गेती, शराब कम क्या है
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